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Taraknath Tantrik Andher Nagri (TNT) Part 1 Review

Taraknath Tantrik Andher Nagri उर्फ TnT एक बेंगाली हारर कामिक्स है .

तारकनाथ तान्त्रिक असल मे प्रसिद्द बंगाली साहित्यकार बिभूतीभूषन बन्दोपाध्याय जी की रचना है जो कि अब पब्लिक डोमेन मे है . (जिसका जिक्र कामिक्स मे होना चाहिए था ) हारर बैकड्राप वाली ये कामिक्स आज के कोलकाता शहर मे स्थित है. कामिक्स के पब्लिशर है स्पीचबबल इन्टरटेन्मेंट . कामिक्स मे 72 पेज है जिसमे से 69 पेज कहानी को समर्पित है व बाकी के ३ पेज बहुत ही जरूरी नान बेंगाली रीडर को बंगाल के कला व लाईफ इश्टाईल आदि से जोडने के लिए एक सम्पादकीय के रूप मे है . कामिक्स का आकार खूनी जंग जितना ही है यानि कि नार्मल TPB के साईज का . कामिक्स के पेज नानग्लासी है और मूल्य है 299/- रू

कामिक्स रेटेड M है ध्यान रहे इसमे न्युडसीन बिल्कुल नही है ये रेटिंग इसे देसी भाषा , खून खराबे व नरभक्षण सीन के कारण दी गई है

लेखक = शमिकदास गुप्ता
चिंत्राकन = तमल साहा व बिकास सतपती
रंग संयोजन = विश्वनाथ मनोकरण
हिंदी रूपांतरण व कैलीग्राफी = विभव पाण्डेय
कवर = शमिक दासगुप्ता व अभिषेक सिंह

{ उपर्युक्त विवरण से तो ऐसा ही जान पडता है मानो यालि क्रिएशन की सिस्टर ब्रांच हो स्पीचबबल हेहेहेहे}

मुख्य किरदार =

तारकनाथ तान्त्रिक = कहानी का नायक , एक एक सूखा मरियल शख्स (जिसकी आयु १०० पार हो सकती है,,,) काली शक्तियो का जानकार तान्त्रिक , जिस तरह से उसने कम आयु व कम समय मे मां काली ( महाकाली कहे या भद्रकाली या रुद्रकाली ) के दर्शन पा लिए , मै कह सकता हु सबसे ताकतवर तान्त्रिक .

आफिसर शंकर = कोलकता पुलिस मे एक आफिसर पाजिबली ACP TnT का मित्र
हारर नावेलिस्ट विभूति = TnT का एक और मित्र जो इनकी कहानियो से प्रेरणा ले नावेल लिखता है,,, देखा जाए तो ये एक तरह से TnT के मूल लेखक को ट्रिब्यूट है
जर्नलिस्ट स्नेहा = शंकर की लवइंटरेस्ट . और इस सीरीज की एक मुख्य किरदारा जिसके बारे मे अभी बताना स्पोइलेर होगा
आर्को राय = कहानी का अभी तक अन्जान मुख्य विलेन
रणजय नियोगी = कहानी का एक और मुख्य पात्र . एक घृणा करने योग्य पुलिस आफिसर जिसने नक्स्ली आंदोलन मे बहुत अमानवीय तरीको से इस आंदोलन का दबन किया

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नक्सलवाडी का चारू-मजूमदार = एक असली किरदार , बंगाल के नक्सली आन्दोलन का जनक
कहानी (प्लाट) = (स्पोईलर )

कहानी कोलकता शहर मे केंद्रित है व मुख्य किरदार Taraknath Tantrik के आसपास ही रहती है,,, कहानी प्रारंभ होती है तारकनाथ के युवा जीवन से जहा वो काली शक्तियो को जानने के लिए तांत्रिका/कपालनी मातु पगली के पीछे पडा है.. और हार के मातु उसे काली दुनिया मे प्रवेश दे ही देती है और तारक उस सत्य से परिचित होता है जिसे प्राप्त करने लोग दशक लगा देते है,,
कहानी यहा से आज के कोलकता मे आती है जहा अचानक से मेट्रो मे आम आदमी वहशी दरिंदे बन के हमला करने लगते है… जिस केस मे शंकर Taraknath Tantrik की मदद लेता है और तब ज्ञात होता है ये सब काली दुनिया से किसी के छेडछाड का नतीजा है,,,

कहानी फिर जाती है 70 के दशक मे कोलकता के नक्सली आन्दोलन के समय जहा दिखाया गया है कि कैसे इस आंदोलन को कुचला गया.. रणजय नियोगी नामक एक कुख्यात पुलिस अफसर की दरिंदगी को चित्रित किया गया है और यही से आज के समय के कोलकता पे आई मुसीबत के तार जुडते दिखाए गए है .
कहानी फिर से आज के कोलकता मे आती है और अब ये वहशी आक्रमण मेट्रो से निकल के आ गया है शहर के पोर्श इलाके मे जहा इस बार शिकार हुए रणजय नियोगी के बेटे का परिवार . TnT शंकर व विभूति के साथ यहा भी काली शक्तियो का हाथ पाता है और फिर वो हास्पिटल मे जाते है जहा रणजय नियोगी एडमिट है जिसे आर्को ने उसके परिवार के हत्याकांड का विडियो दिखा टार्चर कर रहा होता है और जहा रणजय अपनी जीवटता दिखाते हुए उसे बताता है उसका परिवार अभी जिंदा है…. यहा एक छोटी मुठभेड होती है आर्को व TnT व उसकी टीम (शंकर विभूति आदि ) जहा आर्को भागने मे सफल हो जाता है…
अब TnT शंकर व विभूति के साथ जाता है काफी हाउस और वहा लिंबो मे जा के चारू मजूमदार से इस हमले के पीछे कौन है उसका पता लगाता है.
प्रथम खंड यही समाप्त या कहु क्रमशः हो जाता है

आर्ट –
आर्ट काफी बढिया है..कहानी को जैसा ट्रेटमेंट चाहिए था वैसा दिया गया है ..
कहानी एक्शन कम हारर थ्रिल पे ज्यादा फोकस करती है ऐसे मे क्लोज शाट की अहमियत बढ जाती है,,,, जो की आर्टिस्ट ने भी पहचाना और कामिक्स मे दिया .
कामिक्स मे पैनल बहुत है व गैर जरूरी फुल पेज पैनल नही है ( करीब ६ जरूरी स्प्लैश) जिसके लिए आर्टिस्ट की व पब्लिशर की तारीफ करनी बनती है…आमतौर पे देखा गया है कि पेज संख्या बढाने को आजकल के आर्टिस्ट फुल स्केप पैनल की झडी लगा देते है,,, जो कि मुझे परसनली पसंद नही….ध्यान रहे ये कामिक्स कथा का मीडियम है किसी आर्टिस्ट का रिज्युमे नही जहा वो अपनी काबलियत परोसे
आर्ट मे और अच्छा किया जा सकता था कलर भी ठीक है व इंकिंग भी अच्छी है लेकिन कही कही उसमे थोडी कमी दिख जाती है .
कवर की बात करे तो कवर तो भाई %डफाड है . एक मरियल तन्त्रिक को बखूबी दिखया गया जो रह्स्मई संसार की और बडे कान्फिडेंस से देख/बढ रहा है व उल्टे हाथ व काला बैकग्राउंड कहानी के मिस्टिक होने की तरफ इशारा करते है ,,

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आर्टिस्ट से एक शिकायत यहा बनी है.. कई जगह वो अपना रियलिस्ट्क अप्रोच छोडते नजर आए .. जैसे की पेज 25
कहानी मे मुझे जो शिकायत लगी वो कहानी से नही दूसरे कारण से लगी… कहानी मे कहानीकार को अपने परसनल विव्यु अवोईड करने चाहिए .. आप प्लीज किसी दूसरे नावेलिस्ट या कहानी कार का नाम निगेटिव अप्रोच मे न डाले ( पेज 13 पैनेल 2 )

कहानी मे एक बहुत बडा पेच कई चर्चित इतिहास के प्रमुख किरदारो को लिम्बो अर्थात नर्क मे दिखाना साबित हो सकता है… हालाकि यहा उन्हे विलिंगली दिखाया गया है लेकिन यहा थोडा ज्यादा प्रकाश डालने की आव्शयकता थी,, अगर मेन पेजेस मे न सम्भव था तो कम से कम सम्पादकीय मे (हालाकि कोशिश की गई लेकिन वो मुझे अप्रयाप्त लगी )

हिंदी रूपांतरन काफी अच्छा है हालाकि अभी भी कई मिस्टेक है जैसे कोई को काई लिखना कई जगह पे . मै समझता हु कि बंदा नया है लेकिन आज के कामिक्स परिवेश मे आपको जल्द से जल्द सीखना होगा .. उम्मीद है अगले आने वाले पार्ट मे वो मुझे ऐसे नार्मल मिस्टेक का मौका नही देंगे… साउंद एफेक्ट को और प्रभावी बनाने की जरूरत है.


कामिक्स के लिए ब्लैक नान ग्लासी पेज का चयन बिल्कुल गलत है यहा,,,कलर दब के आए है , हालाकि मुझे नान-ग्लासी पेज परसनली पसंद है (हाथ फेरने पे जो मैट फिनिश व खुरदुरापन महसूस होता है वो मुझे बहुत पसंद है ) लेकिन एक आम कामिक्सकर के लिए ये एक सेटबैक है…
मेरे अनुसार कामिक्स कामिक्स का पार्ट मे लाना भी एक गलती साबित हो सकती है , कई हिंदी पाठक इस संशय मे रहेगे कि कही आगे के पार्ट अधर मे न लटक जाए,,
और वो सोचेंगे कि पूरी होने पे एक साथ लेंगे…
खूनी जंग की तरह इसे भी एक साथ लाना चाहिए था

ओवर आल –
ये कामिक्स पिछले 10-15 सालो मे मेरी पढे सबसे बेहतरीन कामिक्सो मे से है
हा मै ये भी कहुंगा कि ये सभी पाठक वर्ग को समान रूप से पसंद नही आएगी . लेकिन ज्यादातर पाठक जिन्हे कुछ अलग की भूख सताती है उनके लिए फुल फीस्ट है .

अब बात करते है इसके दाम की . 72 पेज की कामिक्स के 300 रू कुछ ज्यादा है . अगर मै दूसरे अपने मित्रो व साथियो के कामिक्स रेट नजरिये को देख के कहु तो इसका एक कम्फर्ट जोन वाला रेट 200-225 होना चाहिए था . इस बात को प्लीज पब्लिशर अनदेखा न करे , भारतीय हिंदी रीडर के लिए ये एक महत्वपूर्ण मुद्दा है .

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