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Superhero Parmanu: A history of heartbreaks

राज कॉमिक्स के मशहूर कालजयी किरदारों में Superhero Parmanu का नाम आता है। लगभग 25 साल पुराने इस किरदार के साथ कई प्रयोग किये गए। इस बीच परमाणु सीरीज में लगभग 145 सोलो और दर्जनों मल्टीस्टार, 2-इन-1 कॉमिक्स प्रकाशित हुई। मेरे मत में परमाणु सीरीज को और बेहतर ट्रीटमेंट के साथ नियमित रखा जा सकता था। हालांकि, Raj Comics द्वारा इतने सारे किरदारों को एकसाथ संभालने में 2-3 सुपरहीरोज़ का भाग्य मंद होना स्वाभाविक है। आज परमाणु की ख़राब किस्मत और कम अंतर से मिली हार के बारे में बात करते हैं । यह लेख एक कॉमिक फैन का प्यार है, किसी बात को दिल पर न लें।

परमाणु बनाम डोगा – 1990 के दशक की शुरुआत में भारतीय कॉमिक इंडस्ट्री में काफी प्रतिस्पर्धा थी जो कॉमिक फैन के लिए अच्छा पर प्रकाशकों के लिए नींद हराम करने वाला दौर था। कम समय में नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव और बांकेलाल की अपार सफलता के बाद राज कॉमिक्स को सीमित संसाधनों में नए किरदारों को सुपरहिट बनाना था, जिसके तहत Parmanu और भोकाल को बड़ा पुश मिलने लगा। स्टिकर्स और नॉवेल्टी का एक कॉमिक प्रोमोशन मुझे याद है जिसमे सिर्फ ये 5 किरदार हैं। परमाणु के लिए सब कुछ सही चल रहा था, फिर मुंबई के बाप डोगा का आगमन हुआ। डोगा की पहली कॉमिक कर्फ्यू (जनरल संख्या # 395) आने से पहले ही परमाणु सीरीज 17 कॉमिक्स के साथ रफ़्तार पकड़ चुकी थी, जिनमे 2 विशेषांक हाहाकार (#09), रिवॉल्वर (#11) शामिल थे और ज़ाहिर है कई कांसेप्ट तैयार थे, इन शुरुआती विशेषांको के संख्या कोड दर्शाते हैं कि राज कॉमिक्स टीम को परमाणु पर विश्वास था। यह तब की बात है जब विशेषांक बहुत कम आते थे। राज कॉमिक्स का तीसरा चेहरा बनने की होड़ में डोगा सीरीज को ना सिर्फ मैनेजमेंट की स्वीकृति चाहिए थी बल्कि बाजार में स्थापित हो रहे नाम परमाणु को पछाड़ना था।

1993 से लेकर 1996 के मध्य तक Parmanu की कॉमिक्स में एक के बाद एक ज़बरदस्त सुपरविलेन जैसे बुद्धिपलट, गुणाकर, टाइफून, मैडम कोल्ड, वृक्षा, हायना, अंगार, फंदेबाज आदि आये और “अब मरेगा परमाणु” कॉमिक विशेषांक में इतने सुपरविलेन की भीड़ देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह 3-4 वर्ष पुराना सुपरहीरो होगा। परमाणु सीरीज बहुत अच्छी चल रही थी ममता (प्रलयंका) के बाद बम कॉमिक में शीना अपनी विस्तृत बैकस्टोरी के साथ आ गई जिसमे काफी सम्भावना थी लेकिन उधर डोगा की कहानियों में ऐसा जादू था कि राज कॉमिक्स के स्थाई तीसरे चेहरे के इस मुक़ाबले में पाठकों और राज कॉमिक्स मैनेजमेंट ने आखिरकार 1996-97 में डोगा को चुना। इस पॉइंट के बाद से धीरे-धीरे परमाणु सीरीज नीचे जाने लगी जिसे जल्द ही पहले भेड़िया और फिर भोकाल ने वरीयता क्रम में और नीचे धकेल दिया।

एक मुक्के का दर्द आप क्या जाने अनुपम सर – जब मुझे कोई कठिन काम करने की प्रेरणा चाहिए होती है और खुद को गुस्सा दिलवाना होता है (नेगेटिव मोटिवेशन) तो मैं “आतंकवादी नागराज” के कुछ पैनल याद करता हूँ। उन दृश्यों को देखने-पढ़ने का दर्द मेरे मन में मरते दम तक रहेगा। सुपरहीरोज़ की टीम आतंकवादी नागराज को रोकने के लिए आई है, जिसमे परमाणु भी है। वैरी गुड सर! आई लव यू! कुछ महत्वपूर्ण रोल होगा। इतनी हाइप के बाद एक सीन में नागराज परमाणु को बेहोश कर देता है, सोने पर सुहागा ये कि आसमान से गिरते परमाणु की जान इंस्पेक्टर स्टील बचाता है। फिर भी कोई समस्या नहीं आखिर नागराज सबसे बड़ा सुपरहीरो है, उस से परमाणु का हारना चलता है (चाहे उस समय वो भटका हुआ आतंकवादी नागराज ही सही)….पर अनुपम जी, ढाई किलो का हाथ हो या ढाई क्विंटल का…केवल एक मुक्के में कौन बेहोश होता है? मतलब दुनिया बचाने वाला महानायक परमाणु ना हो गया तिरंगा की कॉमिक्स में गर्दन पर रुमाल बांध कर आधा पैनल खाने वाला गुंडा हो गया। अरे सर मैं तो कहता हूँ….एक मुक्के में श्री मंदार गंगेले जी ना बेहोश हों, कोई शर्त लगा ले मुझसे! खैर, ऐसा अन्याय अक्सर होता रहता था, एक उदाहरण और दूंगा जंगलिस्तान की फाइटिंग में भेड़िया की किक्स ये बड़े-बड़े पैनल्स में और तिरंगा की किक-वार निन्नी से फ्रेम्स में।

बुझता दीपक – 1997 से 2001 तक बीच-बीच में Parmanu की यादगार कॉमिक्स आती रहीं। वर्ष 2000 वैसे डोगा वर्ष था पर उस साल परमाणु की प्रोफेसर एनिमल से लेकर एक नया इतिहास तक प्रकाशित हुई सभी कॉमिक्स अच्छी थी। उम्मीद जगी की शायद फिर से परमाणु केंद्र में आने को है पर डील, विज्ञान मेरा गुलाम जैसे कुछ उदाहरणों को छोड़ दें तो 2001 के बाद से परमाणु को औपचारिकता मोड़ पर रख दिया गया। कभी डोगा को टक्कर देने वाला, भोकाल से भी पहले आया हीरो अब अपनी पुरानी गुडविल पर घिसटता हर कॉमिक सेट में फिलर का काम करने लगा। विस्फोट, हुकूमत, वॉर्म क्वीन, मास्टर माइंड, महामुर्दा, मैं तो अभी आया हूँ….कितनी ही औसत से भी नीचे दर्जे की कॉमिक्स के बाद परमाणु पढ़ने की इच्छा ही ख़त्म होने लगी। एरिया 51 के साथ नियमित परमाणु सीरीज बंद हुई, उसके बाद परमात्मा सीरीज और मल्टीस्टार विशेषांको में कभी-कभार परमाणु को लाया गया।

मिसलेनियस – परमाणु सीरीज में मनु जी के बाद आर्टवर्क की दशा बिगड़ी और Superhero Parmanu कई नए कलाकारों के लिए अभ्यास पुस्तिका बन गया। एक मलाल यह है कि अपने प्राइम में परमाणु की ध्रुव, एंथोनी, डोगा, भोकाल के साथ कोई 2-इन-1 कॉमिक नहीं आयी। बाद में प्रकाशित हुई 2-इन-1 कॉमिक्स में वो पुराना फ्लेवर नहीं आ पाया। ऊपर से तिरंगा और शक्ति के साथ परमाणु की 2-इन-1 कॉमिक्स की रेल सी चला दी गयी, जिनमे कुछ कांसेप्ट ज़बरदस्ती खींचे गए लगे। प्रिंसिपल और इतिहास की ओवरडोज़ से परमाणु के कई विलेन और साइड कैरेक्टर्स दमदार बैकस्टोरी के बाद भी अधूरे से इस्तेमाल हुए।

अंत इस आशा के साथ करता हूँ कि भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री, राज कॉमिक्स का सुनहरा दौर फिर लौटे और परमाणु ही नहीं कई अन्य स्वर्णिम किरदार दोबारा अपने पुराने अंदाज़ में पाठकों के मन व कल्पना पर राज करें।

Artwork – Saket Kumar

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