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Nagraj Ki Kabr

Nagraj Ki Kabr Review : Ain’t No Grave for Crime Fighter

Raj Comics में नागराज सीरीज की पहली कॉमिक्स “नागराज ” का दूसरा भाग है, Nagraj Ki Kabr, कहानी बड़ी शानदार तरीके से आगे बढ़ती है, नागराज जो प्रोफेसर नागमणि के हाथों की कठपुतली है, जिसका निर्माण प्रोफेसर नागमणि ने सिर्फ विश्व में आतंकवाद फ़ैलाने के लिये किया है, लेकिन बाबा गोरखनाथ की कृपा से नागराज बुराई का रास्ता छोड़ के नेकी के रास्ते पे चल पड़ता है.

नागराज ने कसम ली है की वो विश्व से आतंकवाद का सफाया कर देगा ।अपनी इसी कसम के साथ नागराज निकल पड़ता है, अपने विश्व आतंकवाद को ख़त्म करने के एक ऐसे सफ़र पर शायद जिसका कोई अंत नहीं है, नागराज का सबसे पहला निशाना होता है ” बुलडॉग” जिसने सबसे पहले नागराज को अपने चोरी जैसे घिनोने कार्यों के लिये किराये पे लिया था ।

बुलडॉग की तलाश में नागराज एक रात का सफ़र तय करने के बाद साकू कबीले जा पहुँचता है और बस्ती के एक खस्ता होटल में शरण लेता है नागराज को बुलडॉग तक पहुँचने के लिये तलाश है, बुलडॉग के खास आदमी शेखू की, लेकिन तभी कहानी में एंट्री होती कहानी के दिलचस्प किरदार रोमो की “रोमो” जो एक शराबी है , जिसे शराब की बुरी लत है  पर ताकत के मामले में वो किसी से कम नहीं।

 


SANJAY ASHTAPUTRE INTERVIEW : HAPPY GOING DOWN MY MEMORY LANE


 

रोमो का इस रोमांचक कहानी में शामिल होना Nagraj Ki Kabr को और दिलचस्प बनाता है । रोमो जो की कभी शेखू के लिये काम करता था, लेकिन शराब की लत के कारण शेखू के गिरोह से अलग हो जाता है, रोमो को जब पता चलता है की एक बेशकीमती “मूर्ति “जिसे नागराज ने बुलडॉग के कहने पर एक कबीले से चुराया है, वो  अभी भी नागराज के पास ही है, तो रोमो उसे हासिल करने की ठान लेता है। रोमो अपने एक मित्र (उसी खस्ता होटल का मालिक) की मदद से नागराज को झींगा गार में बुला लेता है।जहाँ रोमो और नागराज में भीषण जंग होती है.

Nagraj Ki Kabr में रोमो का एक डायलॉग बेहद शानदार लगता है मैं मास्टर रोमो हूँ और रोमो जो इस दुनियां में सिर्फ एक और अकेला है जिसके पुरखे ताकत की पूजा करते थे और जो मुझे विरासत में मिली है। नागराज अपने हुनर जिनमे वो माहिर है, उस्ताद है, मार्शल आर्ट और स्नेक हैंड का बखूबी इस्तेमाल करता है। मज़ा आता है ये देख के, जंग ख़त्म होती है नागराज की जीत के साथ, रोमो अपनी शिकस्त कबूल कर लेता है।

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Left: Artwork by Author, Right Top: Alternative Cover by Pratap Mulick, Right Bottom: Original Cover by Sanjay Ashtputre

रोमो नागराज की शक्ति का लोहा मान कर नागराज को उस्ताद मान लेता है, जब जब Nagraj Ki Kabr में रोमो नागराज को “उस्ताद ” कहकर संबोधित करता है, कहानी में देशी तड़के मजेदार आभास होता है, परशुराम शर्मा जी की कहानी की और सवांदो की जितनी तारीफ़ की जाये उतनी कम है. चाहे किरदारों की बात की जाए, चाहे चित्रकथा में दिखाये गये स्थानों की. Nagraj Ki Kabr में दिखाये गए झींगा गार , डिब्रू पहाड़ी जैसे नाम भी बड़े शानदार और आकर्षक लगते है, जैसा की भारतीय गाँव कस्बोें के नाम होते है। नागराज द्वारा मिले जीवनदान से रोमो खुद को नागराज का ऋणी मान लेता है, और सच्चे मन से नागराज की मदद करने का फैसला कर लेता है ।


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नागराज रोमो की मदद से शेखू से मिलता है, और बुलडॉग से मिलने की इच्छा जाहिर करता है, पर बुलडॉग को नागराज की इस योजना का आभास हो जाता है, वो और शेखू को नागराज के क़त्ल का आदेश दे देता है । नागराज का विश्वासपात्र दोस्त रोमो उसे पहले ही सावधान करने की कोशिश करता है, मगर उससे पहले ही शेखू अपने गुंडों के दल के साथ हमला बोल देता है. लेकिन नागराज और रोमो मिलकर शेखू और उसके आदमियों को धराशायी करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगाते,और फिर नागराज अपनी सर्पीली आँखों के जादुई सम्मोहन से शेखू को सम्मोहित कर बुलडॉग के अधीन सभी अड्डों की पूरी जानकारी ले लेता है. Nagraj Ki Kabr की कहानी तब एक रोमांचक मोड़ लेती है । पर जब Nagraj रोमो के साथ बुलडॉग के हेडक्वार्टर पहुँचता है, बुलडॉग को नागराज के आगमन की सूचना पहले ही मिल जाती है, बुलडॉग उन्हें एक खतरनाक योजना में फसाकर कब्र में दफ़न कर देता है. क्या नागराज इस कब्र से बाहर आ सकेगा ?  जानने के लिये पढ़े एक हैरतअंगेज कॉमिक्स … नागराज का बदला

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