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Husain Zamin

Interview of Husain Zamin : Sikandar of Madhu Muskaan

आज हम अपने पाठको के लिए लेकर आये हैं Comics जगत के दिग्गज आर्टिस्ट Husain Zamin जी का Exclusive Interview., बचपन में जब कभी मैं उनके चित्रांकन से रचित सागर-सलीम की शानदार चित्रकथाएँ पढता था तो उनके द्वारा रचित पात्र “सागर ” मुझे हमेशा सुपरस्टार अभिनेता Dharmendra जी की याद दिलाता था, तब मैं सोचता था अगर जीवन में कभी Husain Zamin जी से बात होगी तो मैं उनसे ये सवाल जरुर पूछूँगा की सर क्या आप अभिनेता धर्मेन्द्र जी के फैन रहे है ।

और आखिरकार मेरा उनसे बात करने का सपना पूरा हो ही गया कुछ दिनों पहले जब मेरी उनसे बात हुई तो मैंने नमस्कार के बाद जो उनसे पहला सवाल किया वो यही था । उन्होंने भी हसंते हुए जवाब दिया “सही पकडे है ” मुझे मेरे बचपन से दिमाग में धमा चौकड़ी मचाने वाले सवाल का जवाब मिल चुका था ।

 

मधु मुस्कान कॉमिक्स पत्रिका से उनका कॉमिक्स की दुनिया में शानदार चित्रकारी का सफ़र शुरु हो गया । मधु मुस्कान कॉमिक्स पत्रिका में बबलू और कलमदास भी उन्हीं के द्वारा चित्रित पात्र थे जो काफ़ी लोकप्रिय हुए उसके बाद मनोज कॉमिक्स ने उनकी शानदार चित्रकारी ने सिकंदर और सागर-सलीम की जोड़ी को सुपरहिट किया. उनकी चित्रकारी का तो मैं कायल था ही उनसे बात करके मैं उनके हँसमुख और खुशमिज़ाज व्यक्तित्व का भी कायल हो गया.

Husain Zamin जी को प्यार भरा आदाब, हम शुक्रगुज़ार हैं कि आपने हमें अपना कीमती वक़्त दिया। मैं CulturePOPcorn और उसके पाठकों की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत करता हूँ ।

Husain Zamin जी, जैसा कि सब जानते हैं, आप भारतीय कॉमिक्स उद्योग के स्वर्णिम दौर से शानदार सफ़र कर रहे है. कृपया साझा करें कि आपकी चित्रों की दुनिया की यह रंगीन यात्रा कब से शुरु हुई ?
मेरा बचपन महाराष्ट्र के नाशिक जिले के एक छोटे-से कस्बे मनमाड में बीता. मनमाड एक जंक्शन है…बस यही इसकी विशेषता है. शिर्डी जाने वालों के लिए मनमाड से ही होकर गुज़ारना पड़ता था. मेरे बड़े भाई मरहूम मुहम्मद ज़ामिन की पढ़ाई नाशिक के निकट देवलाली के बार्न्स हाई स्कूल में हुई. यह 1960 की बात है. कॉमिक्स क्या चीज़ होती है, यह तब न मुझे और न मेरे भाई को कुछ पता था. उस स्कूल में अधिकतम अंग्रेज़ो के ही बच्चे पढ़ते थे जो आज़ादी के बाद यहीं भारत में रह रहे थे. उन दिनों बाहर से बहुत ही सीमित मात्रा में कॉमिक्स की आयात होती थी, जिसे बार्न्स हाई स्कूल के छात्र पढ़ा करते थे. जैसे DC Comics, Marvel Comics, Gold Key Comics, Harvey Comics, Archie Comics वगैरह.  तब ही मेरे बड़े भाई को Comics पढ़ने का चस्का लगा और उसके बाद मुझे भी लग गया चस्का …जो आज तक कायम है .

उन्ही Comics की नक़ल करके मैंने अपने मनमाड के सेंट मैरी स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगाने शुरू कर दिए थे . तब मेरी नक़ल की गयी Comics को स्कूली छात्रों के साथ-साथ सारे शिक्षकगण और प्रधानाचार्य जी का भी खूब मनोरंजन होता और मुझे तब से ही एक Comic Artist बनने की प्रेरणा मिलती गयी.

 

Husain Zamin Interview CulturePOPcorn

Husain Zamin Ji created Sikandar and Saagar Salim for Manoj Comics and worked with Madhu Muskaan

 

Husain Zamin जी, हमें अपने निजी जीवन के बारे में भी कुछ बताइये ?
मैं तो वैसे मनमाड महाराष्ट्र में ही रहा और पला-बढ़ा लेकिन दिल्ली के अजमेरी गेट में मेरे तायेज़ाद भाई मरहूम तमस्सुक मेहदी साहब रहते थे. अपनी शादी के लिए उन्हें कभी कोई लड़की पसंद ही नहीं आती थी. मेरे ताए अब्बा और ताई अम्मा इस बात से बेहद परेशान और दुखी रहते थे . यह 1974 की बात है.  उन्ही दिनों मेरे लिए पुणे से एक लड़की का रिश्ता आया, नाम था मुमताज़. मुझे तुरंत अपने दिल्ली वाले तायेज़ाद भाई तमस्सुक मेहदी की याद आ गयी और मैंने पुणे से आये मुमताज़ के “प्रपोजल” को दिल्ली “फॉरवर्ड” कर दिया.  मुमताज़ का फ़ोटो दिखाने मैं खुद दिल्ली गया था.  फ़ोटो देख कर उन्होंने तुरंत उसे पसंद कर लिया और शादी के लिए राज़ी भी हो गए.  तब मेरी ताई आम्मा और तमस्सुक भाई ने खूब खातिरदारी की मेरी …मैंने भी खूब छक कर ऐश किया था दिल्ली में .

लेकिन अब मुमताज़ के घर वालों ने रिश्ता नकार दिया क्योंकि दिल्ली पुणे से बहुत दूर है. मरता क्या न करता …मनमाड पुणे से करीब था इसलिए मुझे ही मजबूरन शादी करनी पड़ी मुमताज़ से जो 29 जून 1974 को संपन्न हुई. लेकिन हालात ऐसे हुए कि इसी चित्रकारी के कारण मुझे मनमाड से दिल्ली ही आकर रहना पड़ा और मैं अपने दो बच्चों के साथ 1979 में दिल्ली आकर बस गया.बेचारे मुमताज़ के घर वाले हाथ मलते रह गए और मैं अपने तायेज़ाद भाई की नज़रों में खलनायक बन गया जैसे देवेन वर्मा था धर्मेन्द्र और शर्मीला टैगोर की अभीनित फिल्म “देवर” में.

 


EXCLUSIVE INTERVIEW OF SANJAY GUPTA : COMICS IS MY LIFE, I AM COMICS


 

Husain Zamin जी, आपका सजीव सा लगने वाला शानदार चित्रांकन कलमदास, सिकंदर, बबलू और सागर-सलीम मुझे हमेशा आकर्षित करता रहा है. मनोज कॉमिक्स, मधु मुस्कान साप्ताहिक पत्रिका, मधु मुस्कान कॉमिक्स और अन्य प्रकाशनों के लिये भी आपने काम किया.  इस विषय से जुड़े अपने कुछ अनुभवों का साझा कीजिये?
वैसे तो मैंने पिछले चालीस वर्षों में और भी अनेक प्रकाशनों के लिए काम किया है और आज भी कर रहा हूँ. इंद्रजाल कॉमिक्स, दीवाना, गौरव गाथा, Cartoon Watch, टिंकल, चम्पक, सरस सलिल, सुमन सौरभ, चित्रलेखा, फ़िल्मी कलियाँ, मनोहर कलियाँ, नन्हे सम्राट, सत्यकथा, रंगभूमि और अनेक शैक्षणिक प्रकाशनों की पुस्तकों में भी चित्रांकन किया है. सबसे अधिक मुझे मधु मुस्कान में काम करते हुए अच्छा लगा. राज कॉमिक्स में काम करने की तीव्र इच्छा है, लेकिन शायद मेरी किस्मत में उनके लिए काम करना नहीं । अपनी इच्छा पूरी करने की मैंने अनेक बार प्रयास किया, लेकिन असफ़लता ही हाथ लगी हर बार. हाँ, निकट भविष्य में एक उभरती हुई नई कॉमिक्स प्रकाशन है जिनके लिए मैं आज-कल कॉमिक बना रहा हूँ. इसी साल मेरी वे कॉमिक्स आप सब पढ़ पायेंगे.

मुझे बचपन से लगता था Husain Zamin जी अभिनेता धर्मेन्द्र जी के फैन रहे हैं, और आपसे बात-चीत के दौरान मुझे पता लगा मेरा अनुमान बिल्कुल ठीक था. अभिनेता धर्मेन्द्र जी से जुड़े किसी किस्से को साझा कीजिये ?
जी हाँ …आपने सही ही पता लगा लिया कि मैं धर्मेन्द्र जी का फेन हूँ. कॉमिक सागर-सलीम के चित्रांकन में मैंने सागर के लिए उन्हीं का चेहरा चुना था और सलीम के लिए हास्य अभिनेता महमूद साहब का. अपनी जवानी में मैं इनकी जोड़ी की अनेक फिल्में देखी थीं….ख़ास कर ‘आँखें’. 1975 में धर्मेन्द्र जी अपनी फिल्म “प्रतिज्ञा” की शूटिंग के लिए नासिक आये थे. तब मैंने एक बड़ा सा केक उनको भेंट किया था नासिक जाकर. उस केक की विशेषता यह थी कि उस केक पर मैंने अपने हाथों से धर्मेन्द्र जी का स्केच बनाया था …वह भी ‘किसान’ जैम से.

 

husain-zamin

Husain Zamin Ji awarded Cartoon Watch Lifetime Achievement Award by Late President Shri APJ Abdul Kalam Azad Ji

 

भारतीय कॉमिक्स जगत के नये उभरते चित्रकारों और लेखकों को आप कोई मैसेज देना चाहेंगे?
वर्तमान में नए उभरते हुए चित्रकारों और लेखकों के लिए संघर्ष करना सचमुच बहुत चुनौतीपूर्ण है. प्रतिस्पर्धा बहुत है और कॉमिक्स के प्रकाशक बहुत सीमित.  यही कह सकता हूँ कि वे हिम्मत के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहें. कॉमिक्स के साथ-साथ अपनी रूचि स्टोरीबोर्ड, 2D और 3D की ओर भी केन्द्रित करने का प्रयास करें.  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का दौर है तो इन कलाओं के लेखकों और चित्रकारों का भविष्य उज्वल है .

पुराने समय के प्रशंसक वर्तमान समय में आपके चित्र देखना चाहें तो कहाँ देख सकते हैं ? आपकी कोई साइट या ब्लॉग हो तो कृपया साझा करें .
मेरी कोई साईट या ब्लॉग तो नहीं है. हाँ …फेसबुक पर मेरे तीन पेज हैं जिन पर मेरे मित्र मेरा काम देख सकते हैं .
https://www.facebook.com/Husain-Zamins-Tips-on-art-132536456844377/
https://www.facebook.com/AdvocateVasantSahniByHusainZamin/
https://www.facebook.com/Husain-Zamin-the-Portrait-Maker-520747494622081/

 


SANJAY ASHTAPUTRE INTERVIEW : HAPPY GOING DOWN MY MEMORY LANE


 

यूँ तो आपके लाखों फैन्स हैं … लेकिन आप अपने शुरूआती दौर में किस चित्रकार के प्रशंषक रहे हैं ?
चूंकि मैंने बचपन से ही विदेशी कॉमिक्स पढ़कर अपनी आँखें खोली थीं तो मुझ पर सबसे अधिक वहीँ के चित्रकारों का प्रभाव पड़ा है.  लेकिन सबसे अधिक प्रभाव मुझ पर चित्रकार मिस्टर साए बैरी का रहा जिन्होंने किंग फीचर्स सिंडिकेट के लिए Phantom का चित्रांकन किया था.  Tintin कॉमिक्स में मुझे चित्रकार द्वारा बैकग्राउंड का चित्रण बेहद प्रभावित करता है.

Husain Zamin जी आपका आपके प्रशंसकों और CulturePOPcorn के लिए कोई संदेश ?
यही ….कि अपना स्नेह यूंही बनाए रखें और यदा-कदा याद कर मुझे प्रोत्साहित करते रहें. मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ CulturePOPcorn का जो इन्होंने मुझे अपने मन की बात कहने का मौका दिया.

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