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Devi Chadhurani: Matsayana Review

[रिविव्यु से पहले कुछ साईज की बात….. हम सब फैन कम से कम दो तीन कामिक्स साईज से परिचित है..एक राज कामिक्स या भारतीय हिन्दी कामिक्स का standard साईज. एक अमेरिकी कामिक्स जैसे डीसी मार्वल का स्टैन्डर्ड साईज और इसी का छोटा रूप गाथम द्वारा पब्लिश साईज..दरअसल भारत मे लगभग सभी चीजे ब्रिटिश बेसिक पे चलती है,,, मापक से लेके बिजली व्हिकल रूल तक… किताब पब्लिशिग मे भी ये है….हमे जो डीसी मार्वल की साईज दिख्ती है वो अमेरिकन है जबकि यहा इससे थोडा अलग साईज standard है… असल मे जब हम यहा भारत मे डीसी मार्वल साएज के लिए जाते है तो प्रेस मे हमारे standard साईज को उक्त साईज मे ट्रिम किया जाता है…यही कारण है कि हमारी हिन्दी कामिक्स का साईज ज्यादा लम्बा न हो के थोडा चौडाई लिए होता है….] देवी चौधरानी का भी साईज आपको अलग लगेगा…लेकिन ये एक प्रिट स्टैंडर्ड ही है…ये आकार आपको स्कूल समय की कई किताबो की याद दिला देगा…अब रिविव्यु पे लौटते है…

प्रस्तावना

ये असल मे बंकिमचन्द्र चटोपाध्याय के एक नावेल पे आधारित है (जो की मुख्य पॄष्ठ पे लिखा भी गया है,, इसे शमिकदास गुप्ता जी ने अडाप्ट किया है .कहानी महिला प्रधान है जो कि नाम से ही स्पष्ट है . कहानी बंगाल की भूमि पर उकेरी गई है और समय है 18वी शताब्दी का बंगाल के अंग्रेजो के हाथ मे आने के बाद की…(प्लासी के युद्ध के बाद की) ये बुक १ है मत्स्न्य्या नाम से . याली के बैनर तले ये दूसरी ग्राफिक नावल या कामिक्स है (जहा तक मुझे पता है) कामिक्स अंग्रेजी मे है…… कामिक्स मे 92 पेजेस है जिस्मे से 90 शुद्ध रूप से कहानी को समर्पित है .. एक पेज (प्रथ्म पेज) पे बंगाली नायिका सुचित्रा सेन जी (1931-2014) को श्रद्धाजली दी गई हैऔर आखरी पेज पे लेखक शमिक जी द्वारा एक नोट सा है… मूल्य उस समय 240 रू था

रचनाकार creatives

एडाप्टेशन स्क्रिप्ट व कला निर्देशन = शमिक दासगुप्ता
आर्ट =बिकास सतपथी
गेस्ट आर्ट= एडर मेसीह (ब्राजील) {अन्त मे एक फाईट सीक्वेस बनाया है}
रंग= विश्वनाथ मनोकरण , क्रिमजन स्टुडियो व होली काव स्टुडियो
कवर= सुमित कुमार , रेनाटो गुवेरा (मेक्सिको)
लेटर= रविकिरन BS तंजीन शेख

मुख्य पात्र

प्रफुल्ला/ देवी चौधरानी = मेन नायिका , एक तेज तर्रार लम्बी तगडी लडकी जो कोई भी चीज बहुत तेज सीखती है भयहीन साहसी लेकिन हृदय से मृदुल
भवानी पाठक = “संतान” नामक गिरोह का मुखिया जिसे जमींदार व सरकार डकैत मानती है लेकिन असल मे क्रांतिकारी है… एक प्रकृतिक बिमारी के चलते शरीर तो १४ साल के बालक सा लेकिन असल मे ४५ की आयु पार है
बिसु सरदार = संतान गिरोह का सेकंड इन कमांड
रंगलाल= संतान का हिटमैन व मेन फाईटर व ट्रेनर
जमींदार हरभल्ल्व ओफ भूतनाथ = देवी चौधरानी के ससुर
बृजसुन्दर चौधरी = प्रफुल्ला के पति
Ohnmar San = बर्मीज जलदस्यु अराकन मघ का मुखिया
गुस्ताव अलब्क्युरेक = पुरत्गालीज जलदस्यु का सरदार/कैप्टन
बर्गी=मराठी लुटेरो का गिरोह
मीर मदन खान = नवाब सिराज का जनरल
देवा और निषि = देवी चौधरानी की शिक्षिकाए

कहानी

कहानी की शुरुवात एक लोकल जमीदार के कलकता भागते समय भवानी पाठ्क द्वारा लूट से होती है जहा भवानी पाठक एक पिशाच के क्षद्मरूप मे सामने आता है…इसके बाद कहानी सीधे प्रफुल्ला के गांव से होती है जहा वो अपनी बूढी मां के साथ रह रही होती है… मां के स्वर्गसिधार जाने के बाद वो अपने ससुराल भूतनाथ पहुचती है जहा उसकी सास तो उसे देख प्रफुल्लित होती है लेकिन ससुर दहेज न मिलने के कारण उसे अपनाने से इंकार कर देता है..जिसे प्रफुल्ला सुन लेती है व वहा से भाग जाती है…इस घटना के बाद उसके पति बृज को अघात पहुचता है और वो अपने को कमरे मे बंद कर लेता है…प्रफुल्ला जंगल से एक मरी शेरनी के बच्चे के साथ एक द्वीप पहुचती है जहा वो एक फकीर मीर मदन खान से मिलती है जो उसे एक खजाने का मालिक बना मर जाता है…बाद मे प्रफुल्ला समान की खरीददारी को बजार जाती है जहा उसके अशर्फी इस्तेमाल की गलती के कारण भवानी पाठक उसके घर तक पहुच जाता है वो उसे अपने साथ ले जाता है जहा उसे अपनी मुहिम समझा कर उसे उस्की जगह लेने को कहता है..जिसे प्रफुल्ला मान जाती है इधर बृज अपने पिता से वाद विवाद के चलते घर से भाग जाता है और बर्गियो के हत्थे चढ जाता है जो उसे पुर्तगाली दस्यु को बेच देते है…इधर भवानी प्रफुल्ला को देवी चौधरानी बना देता है वो बर्मीज दस्युओ के साथ संधि कर के वो पुर्तगाली दस्युओ के खिलाफ मोर्चा खोलने निक्ल पडते है…

समीक्षा

कहानी का जेनर अगर आप तय करने को कहे तो मै इसे एडवेंचर श्रेणी मे रखुंगा…हाल्कि भाषा चुकि अंग्रेजी है तो वो लहजे वाला फील नदारत है…जो एक इस तरह की कामिक्स मे जरूरी है.. एक नार्मल शिकायत जो मेरी आजके समय के हर कामिक्स से है वो है साईलेंस का नदारत होना…. कई बार बिना शब्द सिर्फे इक्स्प्रेशन के जरिये कहानी कही जा सकती है…कई बार डाय्लाग को आधा छोड देना भी एक असली माहौल बनाता है…हर जगह डायलाग का होना वो भी एक तेज सीन मे इसे कास्मेटिक अप्रोच दे देता है….थोडा नेचुरल्ती डालनी चाहिए….. असल जीवन मे हम भारी डाय्लाग एक सार मे नही बोल जाते…..सास लेने … सामने वाले का मन पढने को पाज लेना आदि शामिल होता है…बाडी लेंग्वेज बदलती है…. ओर कई बार वाक्य आधे ही छोड दिए जाते है….ये सब चीजे सजीवता प्रदान करती है… उम्मीद है ज्यादा से ज्यादा लेखक इस और ध्यान देंगे…. हा ये मै मानता हु ऐसा करने से चित्र बढ जाएगे व उसके साथ पेज व कामिक्स के रेट भी लेकिन मै ये बडे रेट देने को तैयार हु…

चित्र

चित्र अच्छे बने है….. बहुत अच्छे नही कह सकता क्योकि कई भारतीय कामिक्स व चित्रकारो ने ही बहुत अच्छे का मापक हाई किया हुआ है…किरदारो को रेफ्रेण्स ले के बनाया लगता है….. देवी चौधरानी खुद अनुष्का शेट्टी की मिरर इमेज है (और अनुष्का मुझे पसंद है खीखीखी) लेकिन मेरा मानना है कि अगर रेफ्रेन्स ही लेना था तो किसी बेंगाली एक्टेरेस या स्टार का लिया जाता…. कहानी मे फेशियल एक्सप्रेशन को प्रमुख्ता से दिखाया गया है जिसके लिए आर्टिस्ट की तारीफ बनती है…खास कर होठो को दांत से दबाना ..सोचती आंखे जैसे gesture को बहुत खूबी से दिखाया गया है…..बैकग्राउन्ड भी भरपूर है व सुदरवन की ग्रीनरी को बिना आलस्य कामिक्स मे जगह दी गई है…कहानी मे एक्शन सीन कम है और एक मेजर देवी चौधरानी के एक्शन को लेटिन अमेरिकी इस्टाईल मे बन्वाया गया है ब्राजीलियन आर्टिस्ट से जो की जोरदार बना है

मुझे चित्र मे दिक्कत ये लगी की कही कही वो लय खोते लगे ,,,देवी चौधरानी व पाठक को तो बखूबी हैडल किया गया लेकिन बाकियो मे लगा रश कर दिया ,,,, इंकर ने भी बढिया काम किया हाल्कि ऐसे कहानी वाली कमिक्स मे मै क्रास हैच एक्स्पेक्ट करता हु उसकी कमी खली….. कलर मे भी काम बढिया हुआ है….ऐसी विविधता से भरे लैंडड्राप वाली कामिक्स को कलर करना कोई असान काम नही लेकिन कलरिस्ट ने काहिली नही दिखाई कही…. पहले पेज व आखरी पेज मे आप कलर मे उच नीच न पाएगे….. हालाकि ओवर आल अप्रोच डार्क रक्खा गया जो कि मुझे परसनली पसंद नही आया….

अब एक परसनल सुझाव या रिक्वेस्ट यालि से व अन्य सभी कामिक्स प्बलिशर से भी,,,कामिक्स मे कलरिंग आज के समय मे टूल बेस हो गई है…. PS के आने से कुछ असानी बढी है लेकिन मेरे नजर मे दिक्कत भी सबसे ज्यादा बडी,,, नेट tuts से भरा है…दो एक साल मे बंदे %ड फाड काम करने लगते है लेकिन वो बस टूल मे अटक जाते है….मेरा परसन्ल विव्यु ये है कि ऐसी कहानी का कलर ट्रीटमेंट सबसे प्रमुख है…. अगर मै इस कामिक्स को रंगता तो वाटर कलर अप्रोच लेता या डुओ टोन वाश रख्ता या पेन्सिल कलर या पोसटर कलर ट्रीटमेंट रखता…ऐसी कहानी मे अलग ट्रीटमेट आवश्यक हो जाता है…. और थैन्क्स गाड यालि ने टिपिकल आर्ट कलास रूल येलो/गोलडेन ह्यु न रक्खा ( जो कि एक पीरियड कहानी मे होता ही है )वैसे ये भी सत्य है कि वाटर कलर सब्से कठिन माध्यम मे से एक है और सिर्फ बेसिक जानने वाला ही डिजिटल टूल से इसे क्रीएट कर सकता है फ्लालेसली और ये भी एक सत्य है कि ऐसे मे कामिक्स का रेट पर पेज 20 से 75 % बढ जाएगा और आज के समय मे भारतीय कामिक्स सबसे ज्यादा रेट सेंसिटिव है….एक और प्राथना अगर कोई ऐसा काम करवाने जा रा तो प्लीज प्रो से ही करवाए…. मुझे एक अधकचरे काम से बुरा कुछ न लगता है….वो कहते है न uncooked rice , good for nothing

 

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